मधु बागान

 

मधु चाय बागान का पहले का नाम पाटाबाड़ी था। 1929 में मधु बागान की स्थापना जलपाईगुड़ी के रहने वाले बंगाली परिवार राय परिवार ने की थी। मधु बागान के पास एमईएस चौपाथी के पास से एक रेल लाईन जयगाँव जाती थी। उस रेल लाईन को भुटान को भारत से जोड़ने और दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। पहले यहाँ छोटी लाईन की ट्रेन चलती थी। एमईएस चौपाथी के पास जहाँ ट्रेन लाईन  धीमी गति से मुड़ती है, वहाँ एक रेलवे स्टेशन था। उसका नाम मुर्गामारा था। हासीमारा और मुर्गामारा स्टेशन नाम के पीछे क्या कहानी था, यह अब पता नहीं  चलता है। बगानियार भाषा में मधु चाय बागान एक बाबु बागान है। क्योंकि यहाँ मैनेजर को भी मैनेजर बाबु कहा जाता है। मधु बागान को राय परिवार ने 2000 ईस्वी के लगभग बेच दिया था और उसे अन्य कंपनी ने खरीद लिया। 2013 में बोनस और वेतन पर मालिक पक्ष और मजदूर पक्ष में मतभेद होने के बाद यह बागान बंद हो गया है। 

मधु बागान में 99% चाय बागान से जुड़े परिवार निवास करती है। जब यह बागान बंद हुआ तब यहाँ मजदूरों की संख्या 1000 थी। लेकिन बागान बंद हो जाने के बाद आधे मजदूर दूर शहरों में रोजगार के लिए चले गए। काफी लोग केरल, तमिलनाडु, दिल्ली, कश्मीर आदि में कार्य करने के लिए चले गए. जो बचे वे जयगाँव और भुटान के फून्टशोलिंग शहरों में डेली बेजर के रूप में काम करने के लिए जाते हैं। मधु बागान के पास हासीमारी एयरफोर्स होने के कारण काफी लोग यहाँ भी मजदूर के रूप में कार्य करते हैं और अपना परिवार का पेट भरते हैं। 

मधु बागान में कई समुदाय मिल जुल कर रहते हैं। 80% जनसंख्या यहाँ ऊराँव भाषी हैं। शेष 20% में मुण्डा, खड़िया, लोहरा, चिकबड़ाईक, कुम्हार, असुर, महली,  गोर्खा, बंगाली, बिहारी, मारवाड़ी आदि समुदाय के लोग हैं। यहाँ के उराँव बहुत कम कुड़ुख बोलते हैं, अधिकतर सादरी का ही प्रयोग करते हैं। 

मधु बागान में एक प्राईमरी स्कूल और एक पाँचवी से 12वीं तक के स्कूल है, जिसमें बंगला माध्यम से पढ़ाई होती  है। उच्चतर माध्यमिक स्कूल के बगल में आदिवासी युवाओं द्वारा एक अंग्रेजी स्कूल की स्थापना की गई है, जिसमें बच्चों को अंग्रेजी सिखाया जाता है। यहाँ एक बड़ा मैदान है, जिसमें बच्चे फूटबॉल और क्रिकेट आदि खेलते हैं। यहाँ एक डाक बंगला हुआ करता था, लेकिन बागान बंद हो जाने के बाद फैक्ट्री और डाक बंगला तथा मैनेजर बंगला सभी जर्जर स्थिति को प्राप्त हो चुके हैं। यहाँ बागान के लोगों में अपने बच्चों को पढ़ाने की ललक है और अनेक बच्चे पास के एमईएस चौपाथी या साताली चाय बागान स्थित अंग्रेजी स्कूल में भेजे जाते हैं। 

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