डुवार्स के प्रथम अनशनकारी टोडरमल ख़लख़ो

 

श्री टोडरमल खलखो, नागराकाटा चाय बागान के मजदूर नेता हैं। मजदूर अधिकारों और अपने साथ हुए अन्याय का विरोध करने के लिए वे अगस्त 2021 के दूसरे सप्ताह में नागराकाटा बागान के फैक्ट्री के सामने अनशन करने बैठ गए।
वे मजदूरों के अधिकारों के लिए नागराकाटा चाय बागान के प्रबंधन से हमेशा लड़ते रहे हैं। उनके मजदूरों के प्रति समर्पण और ईमानदारी से बागान प्रबंधन खुश नहीं था। आमतौर से बागान प्रबंधन मजदूर नेताओं को कई सुविधा देकर उन्हें अपने पक्ष में करके रखते हैं, ताकि श्रमिक नेतागण मजदूरों के मद्दों पर अधिक मुखर न हों।
घटनाक्रम के कुछ दिन पहले एक मजदूर के साथ बागान प्रबंधन का गरमा-गरम बहस चल रहा था। तब टोडरमल खलखो ने वहाँ पहुँच कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन बागान प्रबंधन ने उलझने वाले मजदूर को तो छोड़ दिया लेकिन टोडरमल को इसके लिए दोषी ठहराया । कुछ दिनों के बाद एकतरफा कार्रवाई करके उन्हें बागान कार्य से निकाल दिया साथ ही उन्हें उनके बागान क्वार्टर को छोड़ने का नोटिस दिया। इन सबको टोडरमल ने अपने साथ अन्याय माना और घर छोड़ने के नोटिस को अपने निवास करने के हक पर हमला माना और इसके विरोध में वे अनशन पर बैठ गए।
उनके अनशन पर बैठने से चाय अंचल में एक नयी परंपरा का आगाज हुआ। इससे पहले तमाम अन्याय, पक्षपात और भेदभाव के बावजूद कोई मजदूर ने अनशन का रास्ता नहीं चुना था। 1980 के दशक में कालचीनी ग्रुप्स के बागान बंद हो जाने पर स्व. खुदीराम पहान ने बागान खोलने के लिए कालचीनी थाना मैदान में अमरण अनशन किया था। लेकिन अपने साथ व्यक्तिगत रूप से हुए अन्याय के लिए किसी ने अनशन का रास्ता नहीं चुना था।
अनशन अपने अधिकारों के लिए एक रास्ता और हथियार है और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसे हथियार के रूप में खूब इस्तेमाल किया गया था। चाय बागान में अन्याय के खिलाफ अनशन करके विरोध किया जा सकता है,  यह उन्होंने चाय बागान के बगानियारों को बताया। उनके अनशन पर क्षेत्र के तमाम युवा और अन्य संगठन उनके समर्थन में साथ में खड़े हो गए। उत्तरबंग चाय श्रमिक संस्था, उलगुलान भारत आदिवासी एकता मंच तथा पीपीपी आदि मजदूर संघ उनके समर्थन में आगे आए और अपना समर्थन व्यक्ति किया।
श्री टोडरमल खलखो को चाय अंचल में पहली बार व्यक्तिगत न्याय प्राप्ति के लिए अनशन का रास्ता चुनने के लिए याद किया जाएगा।

फोटे-फेसबुक से साभार

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